निश्चित होगा परिवर्तन - संघ गीत (Nishchit Hoga Parivartan - Geet)

Nishchit Hoga Parivartan - Sangh Geet Lyrics in Hindi

श्रद्धामय विश्वास बढ़ाकर,
सामाजिक सद्भाव जगायें ।
अपने प्रेम परिश्रम के बल,
भारत में नव सूर्य उगायें ॥
जाग रहा है जन-गण-मन !

निश्चित होगा परिवर्तन...

शुद्ध सनातन परम्परामय,
प्रेम भरा व्यवहार रहे ।
ऋषि-मुनियों की शिक्षाओं पर,
चलने का संस्कार रहे ॥
राह रपटती इस दुनिया में,
कुल-कुटुम्ब का संरक्षण,
निश्चित होगा परिवर्तन...

सब समाज अंगांग परस्पर,
छुआछूत लवलेश न हो।
प्रीति-रीति भर गहन सभी में,
भेदभाव अवशेष न हो॥
बनें परस्पर पूरक-पोषक,
हृदयों में रस-धार सृजन,
निश्चित होगा परिवर्तन...

हरी-भरी हो धरती अपनी,
मिट्टी का भी हो पोषण।
पंच तत्व की मंगल महिमा,
दिव्य धरा के आभूषण ॥
पुरखों के विज्ञान-धर्म की,
परम्परा का को वरण,
निश्चित होगा परिवर्तन...

स्वाभिमान भर, भाव स्वदेशी,
स्वत्व बोध का ले आधार।
परहित ध्यान परस्पर पूरक,
जन-जीवन का शिष्टचार॥
विश्व मंच पर भारत माँ के,
यश की हो अनुगूँज सघन,
निश्चित होगा परिवर्तन...

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निश्चित होगा परिवर्तन - संघ गीत

Nischit Hoga Privartan Lyrics in Hindi

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