माँ सीता स्तुति मंत्र - सकलकुशलदात्रीं (Sita Maa Stuti Mantra Sakal Kushal Datri)

Sita Maa Stuti Mantra Sakal Kushal Datri with meaning

सकलकुशलदात्रीं भक्तिमुक्तिप्रदात्रीं,
त्रिभुवनजनयित्रीं दुष्टधीनाशयित्रीम्॥

जनकघरणिपुत्रीं दर्पिदर्पपहीं,
हरिहर विधिक नौमि सद्भक्त भर्नीम्॥

मैं उन भगवती सीता जी की स्तुति करता हूँ। जो सर्वमङ्गलदायिनी हैं। यहाँ तक कि भक्ति और मुक्ति का भी दान करती हैं। जो त्रिभुवन की जननी है तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली हैं।

जो राजा जनक की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थी तथा जो अभिमानियों के गर्व को चूर्ण-विचूर्ण कर देने वाली हैं। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की भी जननी हैं एवं श्रेष्ठ भक्तों का पोषण करने वाली हैं।

माँ सीता स्तुति मंत्र

सकलकुशलदात्रीं भक्तिमुक्तिप्रदात्रीं,
त्रिभुवनजनयित्रीं दुष्टधीनाशयित्रीम्॥

जनकघरणिपुत्रीं दर्पिदर्पपहीं,
हरिहर विधिक नौमि सद्भक्त भर्नीम्॥

जो सभी प्रकार की कुशलता (कल्याण) प्रदान करने वाली हैं, भक्ति और मुक्ति देने वाली हैं, तीनों लोकों की जननी हैं, दुष्टों का नाश करने वाली हैं।​

जो जनक महाराज की पुत्री हैं, अहंकारियों के अहंकार को नष्ट करने वाली हैं, हरि (भगवान विष्णु), हर (भगवान शिव) और विधि (ब्रह्मा) द्वारा वंदित हैं, उन सद्भक्तों की पालनकर्ता देवी सीता को मैं प्रणाम करता हूँ।

Sita Maa Stuti Mantra Images

Sita Mata Stuti Mantra, Powerful Mantra of Mata Sita with meaning
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